•Monday, November 09, 2009
यही संगठन डोमेन नेम की निगरानी करता है, जिसकी इसी हफ्ते यहां बैठक होने जा रही है। हर वेबसाइट, ईमेल अड्रेस या किसी ब्लॉग पोस्ट के आखिर में 'डॉट कॉम' या इसी की तरह आखिर में आने वाला सफिक्स या उपनाम डोमेन कहलाता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो अपनी वेबसाइट को मनपसंद नाम देना चाहते हैं। सिर्फ अंग्रेजी में डोमेन नेम की व्यवस्था होने की वजह से नाम चुनने के ऑप्शन लिमिटेड होते थे, लेकिन अब अंग्रेजी के अलावा बाकी भाषाओं में भी यही सुविधा उपलब्ध होने पर हमारे पास अनगिनत ऑप्शन होंगे।
आईकैन की इस बैठक में इस बात पर विचार किया जाना है कि क्या इंटरनेट अड्रेस को लैटिन लेटर्स के बजाय स्क्रिप्ट में लिखा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इंटरनेट अड्रेस को अरबी, कोरियाई, जापानी, ग्रीक, हिंदी और सिरिलिक (रूसी) में भी लिखा जा सकता है। आईकैन बोर्ड के चेयरमैन पीटर डेंगाटे ने इसे इंटरनेट के लिए फैंटेस्टिक कॉम्प्लिकेटेड टेक्निकल फीचर बताया है। इंटरनेट की शुरुआत 1969 में अमेरिकी यूनिवर्सिटी में हुई, लेकिन 1990 के बाद दुनियाभर में इसका इस्तेमाल बिजली की तेजी से बढ़ा।
प्रस्तुत पोस्ट कि मूल प्रति आप यहा जा कर पढ सकते है
मैंने हर पोस्ट पर यह जरूर बताया है की मैंने यह सामग्री कहाँ से आयात की है व लेखक का नाम भी छापा है फिर भी अगर लेखक को कोई आपत्ती है तो कृपया टिप्पडी द्वारा सूचित करें आपके द्वारा लिखी पोस्ट हटा ली जायेगी - आपका वीनस केसरी
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1 टिप्पणियाँ:
वीनस जी, पहली बार भारतीय सरकार ने भी अच्छा काम किया है। भारतीय सरकार ने .भारत नाम से डोमेन नेम रिज़र्व कर भी लिया है :)
जानकारी के लिये शुकिया...